
द कहता है, प्यारे बच्चों,
तुम्हें विलोम सिखाता हूँ,
शब्दों के बीच उल्टेपन को,
अपनी भाषा में समझाता हूँ।
बड़ा का विलोम होता छोटा,
और पतले का विलोम है मोटा,
दिन का रात, सुबह का साम,
व सम्मान का विलोम है अपमान।
आने का जाना, हँसने का रोना,
लेने का देना व जगने का सोना,
मीठे का तीता, हलके का भारी,
भरे का खाली व नर का नारी।
सीधे का विलोम उल्टा आए,
और धीरे का तेज हो जाए,
विलोम वह तत्त्व कहलाए,
जो दो शब्दों के उल्टे गुण को दर्शाए।
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तुम्हें विलोम सिखाता हूँ,
शब्दों के बीच उल्टेपन को,
अपनी भाषा में समझाता हूँ।
बड़ा का विलोम होता छोटा,
और पतले का विलोम है मोटा,
दिन का रात, सुबह का साम,
व सम्मान का विलोम है अपमान।
आने का जाना, हँसने का रोना,
लेने का देना व जगने का सोना,
मीठे का तीता, हलके का भारी,
भरे का खाली व नर का नारी।
सीधे का विलोम उल्टा आए,
और धीरे का तेज हो जाए,
विलोम वह तत्त्व कहलाए,
जो दो शब्दों के उल्टे गुण को दर्शाए।
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१.
द से दवात, द से दही,
दवात में है स्याही भरी,
दही खाओ व लिखते जाओ,
पढ़-लिखकर नाम कमाओ।
२.
दही खाओ, बलवान बनो,
पढ़ो-लिखो व महान बनो,
सदा दूसरों की सेवा करना,
आपस में कभी न लड़ना,
चोरी तुम कभी न करना,
कड़वी बात कभी न कहना,
माँ भारती के सच्चे सेवक,
व देश के कर्णधार बनो,
देश सेवा का व्रत लिए,
तुम शिवा व प्रताप बनो,
लक्ष्मी बनो या बनो दुर्गा,
कृष्ण बनो या राम बनो,
शांति फैले सारे जग में,
ऐसा तुम इंसान बनो,
ऐसा तुम महान बनो।।
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-प्रभाकर पाण्डेय
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द से दवात, द से दही,
दवात में है स्याही भरी,
दही खाओ व लिखते जाओ,
पढ़-लिखकर नाम कमाओ।
२.
दही खाओ, बलवान बनो,
पढ़ो-लिखो व महान बनो,
सदा दूसरों की सेवा करना,
आपस में कभी न लड़ना,
चोरी तुम कभी न करना,
कड़वी बात कभी न कहना,
माँ भारती के सच्चे सेवक,
व देश के कर्णधार बनो,
देश सेवा का व्रत लिए,
तुम शिवा व प्रताप बनो,
लक्ष्मी बनो या बनो दुर्गा,
कृष्ण बनो या राम बनो,
शांति फैले सारे जग में,
ऐसा तुम इंसान बनो,
ऐसा तुम महान बनो।।
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-प्रभाकर पाण्डेय
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